Posts

Showing posts from October 18, 2020

Updates: India's COVID Tally Crosses 78 Lakh-Mark, Over 1.17 Lakh Deaths

India's coronavirus count has crossed 78 lakh with a jump of 53,370 cases in the last 24 hours, government data shows. And 650 deaths in the last 24 hours have pushed the total death count to... from NDTV News - India-news https://ift.tt/3kykcaw via IFTTT

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज जवानों के बीच मनाएंगे दशहरा, चीन को देंगे सख्त संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज सिक्किम में LAC पर शस्त्र पूजा करेंगे. अपने दो दिनों के दौरे के पहले दिन राजनाथ सिंह ने शनिवार को दार्जिलिंग में जवानों से मुलाकात की और उनका कार्यक्रम भी देखा. from Zee News Hindi: India News https://ift.tt/3onhYwT via IFTTT

दशहरे के मौके पर आज आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत करेंगे संबोधित

विजयदशमी का वार्षिक कार्यक्रम कई मायनों में महत्वपूर्ण होता है. यहां से सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के संबोधन में संघ की भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा तय होती है. from Zee News Hindi: India News https://ift.tt/35sUD4k via IFTTT

आज और कल दशहरा, रावण के पुतलों पर भी कोरोना का असर और भाजपा में कोरोना बम

Image
नमस्कार! देश में आज और कल दशहरा मनेगा। कोरोना की वजह से कई जगह रावण दहन नहीं होगा। जहां दहन होगा, वहां भी रावण की ऊंचाई 90% तक कम रहेगी। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ... आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर प्रधानमंत्री मोदी सुबह 11 बजे मन की बात करेंगे। IPL में बेंगलुरु-चेन्नई के बीच दोपहर साढ़े तीन बजे से और राजस्थान-मुंबई के बीच शाम साढ़े सात बजे से मैच। मथुरा-वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के कपाट खुलेंगे। दर्शन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव पर सरसंघचालक मोहन भागवत का भाषण। देश-विदेश भाजपा में कोरोना बम प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी रैली के अगले ही दिन भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस कोरोना पॉजिटिव हो गए। वे मोदी की रैलियों की तैयारियों में शामिल थे, हालांकि बीमार होने के चलते उन्होंने मोदी के साथ मंच साझा नहीं किया था। उनसे पहले बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, सांसद राजीव प्रताप रूडी, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह भी कोरोना पॉजिटिव हो...

खरीदारी के लिए पूरा दिन शुभ, विजय मुहूर्त में श्रीराम और शस्त्र पूजा, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए तीन मुहूर्त

Image
हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक आश्विन महीने की दशमी तिथि और विजय मुहूर्त के संयोग पर विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस संयोग की तारीख को लेकर असमंजस है। ज्योतिषियों के मुताबिक 25 अक्टूबर को दशमी तिथि के दौरान दिन में विजय मुहूर्त में श्रीराम, वनस्पति और शस्त्र पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मूर्ति विसर्जन और शाम को रावण दहन की परंपरा है। विजयादशमी को ज्योतिष में अबूझ मुहूर्त कहा गया है। यानी इस दिन प्रॉपर्टी, व्हीकल और हर तरह की खरीदारी की जा सकती है। इस दिन पूजा, खरीदारी और विसर्जन के लिए 3 मुहूर्त हैं। वहीं, इसके अगले दिन सूर्योदय के समय दशमी तिथि होने से 26 अक्टूबर को भी मूर्ति विसर्जन किया जा सकेगा। इस दिन सुबह करीब 11:30 तक दशमी तिथि होने से मूर्ति विसर्जन के लिए 2 मुहूर्त रहेंगे। विजयादशमी के बारे में ज्योतिषियों का मत इस बार दशहरा देश के कुछ हिस्सों में 25 को तो कुछ जगह 26 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। वाराणसी, तिरुपति और उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पंचांग गणना के मुताबिक 25 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व मनाना चाहिए। विद्वानों का कहना है कि पंजाब, मुंबई और राजस्थान के भी बड़े पंच...

100 में से 20 मरीजों में पोस्ट कोविड सिंड्रोम आ रहे, जानिए दूसरी बार कोरोना कितना खतरनाक

Image
कोरोना से ठीक हो चुके मरीज, अब दूसरी बार भी संक्रमित हो रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र में 4 डॉक्टर दूसरी बार कोरोना संक्रमित हो गए। देश और दुनिया में इस तरह के मामले अब रोज आ रहे हैं। रिसर्च के मुताबिक, दूसरी बार कोरोना पहली बार की तुलना में ज्यादा खतरनाक है। एम्स दिल्ली में रुमेटोलॉजी डिपॉर्टमेंट की हेड डॉ. उमा कुमार कहती हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके 100 में से 20 लोगों में पोस्ट कोविड-19 सिंड्रोम देखने का मिल रहा है। मतलब मरीज कोरोना से ठीक तो हो रहे हैं, लेकिन उनमें कोरोना का कोई न कोई लक्षण बाकी रह जा रहा है। री-इंफेक्शन्स के भी ज्यादा केस आ रहे हैं। हालांकि, हर किसी में यह सीरियस ही होगा, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। इसलिए वे लोग जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और हाथ धोने जैसी बेसिक गाइडलाइन का पालन पहले की ही तरह करना चाहिए। ठीक हुए मरीजों को क्या दिक्कतें हो रही हैं? दोबारा कोरोना होने को लेकर जो रिसर्च रिपोर्ट आ रही हैं, वो डराने वाली हैं। ब्रिटेन में हुई एक स्टडी में पता चला है कि कोविड-19 के मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी कई ल...

डरना जरूरी है! कोरोना की दूसरी लहर का खतरा टला नहीं है, जानिए क्यों?

Image
कोरोना को लेकर लगातार अच्छी खबरें आ रही हैं। मरीजों का आंकड़ा 78.24 लाख को पार कर चुका है, लेकिन राहत की बात यह है कि करीब 90% लोग रिकवर कर चुके हैं। 19 अक्टूबर को 87% रिकवरी रेट था, जो 24 अक्टूबर तक 89.74% गया। तीन दिन में एक्टिव केस में भी 58 हजार की कमी हुई है। क्या इसका मतलब है कि कोरोना का खतरा खत्म हो गया? नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से लेकर केंद्र सरकार के अधिकारी और विशेषज्ञ दोहरा रहे हैं कि अब और सावधान रहने की जरूरत है। क्या है इसका कारण? क्या है दूसरी लहर, जिसका डर दिखाया जा रहा है? सबसे पहले समझते हैं कि महामारी में दूसरी लहर क्या होती है? यह समझना जरूरी है कि महामारी से जुड़ी शब्दावली में सेकंड वेव या दूसरी लहर एक महत्वपूर्ण स्टेज होती है। इसमें पहले तो इंफेक्शन एक ग्रुप को होता है। फिर केस कम होने लगते हैं। अचानक आबादी के दूसरे ग्रुप में केस सामने आने लगते हैं। पहले से ज्यादा तेज गति से केस बढ़ते हैं। इसे ही दूसरी लहर कहते हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका में इस समय केस तेजी से बढ़ रहे हैं और इसे कोरोनावायरस दूसरी लहर ही कहा जा रहा है। इ...

बजट चार गुना कम हुआ, फंडिंग 25% घटी; आम दिनों में 15 हजार करोड़ का कारोबार होता है

Image
पश्चिम बंगाल की दुर्गापूजा भी इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गई है। हालात यह हैं कि जिन पंडालों पर करोड़ों रुपए खर्च होते थे, उनका खर्च इस साल 8-10 लाख पर आ गए है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां बिजनेस घरानों से मिलने वाले चंदे में भारी कमी आई है। इससे पंडालों ने सीमित खर्च किया है। बंगाल के दुर्गा पूजा के इतिहास में यह पहली बार यह नजारा देखने को मिला, जब पंडालों में ना तो कोई खास तामझाम नहीं किया गया है और ना श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हैं। फोरम फॉर दुर्गोत्सव के मुताबिक, पांच दिनों तक चलने वाली कोलकाता की 100 बड़ी पूजा फेस्टिवल में करीब 4500 करोड़ रुपए का लेनदेन होता है। जबकि, पूरे पं. बंगाल में करीबन 15,000 करोड़ रुपए का लेन-देन होता है। वहीं, लाखों की संख्या में रोजगार देने वाली इस पूजा ने इस साल कई लोगों को बेरोजगार कर दिया है। टूर एंड ट्रैवल, फूड और गारमेंट्स इंडस्ट्री ठप होने के चलते इस साल केवल 30-40% को ही काम मिल पाया है। कोलकाता में हर साल कुल 4500 कम्युनिटी पूजा होती है। इनमें 200 पूजा ऐसी हैं, जिनमें हर पूजा में 50 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। 4300 ऐसे पूजा पंडाल हैं, जिनमें 20...

यहां 9 दिनों तक राजा का दरबार लगता है, 10वें दिन 750 किलो सोने के सिंहासन पर चामुंडेश्वरी देवी का जुलूस निकलता है

Image
दशहरा को कर्नाटक में स्‍टेट फेस्टिवल का दर्जा दिया गया है। यहां पर एक दिन नहीं, बल्कि 10 दिन तक दशहरा मनाया जाता है। इस दौरान सबसे खास होती है जम्बो सवारी और टॉर्च लाइट परेड। इसमें 21 तोपों की सलामी के साथ महल से हाथियों का जुलूस निकाला जाता है। इसमें एक ऐसा हाथी भी शामिल होता है, जिसे खास तरह से सजाया जाता है। इस हाथी पर 750 किलो सोने का एक सिंहासन रखा जाता है। इस पर देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा रखी जाती है। हर साल 750 किलो के सोने के सिंहासन पर मां चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को लेकर हाथियों का काफिला मैसूरु के शाही राज महल से शहर में निकलता है, तो इसे देखने के लिए लाखों की भीड़ जमा होती है। अलग-अलग जिलों की झांकियां निकाली जाती है, लोक-कलाकार शोभा यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार कोरोना के चलते मां चामुंडेश्वरी की सवारी तो निकलेगी, लेकिन सिर्फ 300 लोग ही शामिल होंगे। इसके पहले करीब 10 लाख लोग शामिल होते थे। साथ ही इस बार कोई भी झांकी नहीं होगी और न ही लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते दिखेंगे। मैसूरु में दशहरे के दौरान सबसे खास होती है जम्बो सवारी। जिसमें राज महल से हाथियों का ...

आजाद भारत के पहले चुनाव की प्रक्रिया शुरू; 68 फेज में हुई थी वोटिंग

Image
भारतीय लोकतंत्र में 25 अक्टूबर की तारीख बहुत खास है। 1951 में इसी दिन से चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी, जब हिमाचल प्रदेश के चिनी में पहला वोट डाला गया था। 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक यानी करीब चार महीने चली उस चुनाव प्रक्रिया ने पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक देशों की कतार में भारत को ला खड़ा किया था। एक अहम फैक्ट यह है कि पहले लोकसभा चुनाव में प्रति वोटर खर्च आया था 60 पैसे, जो 2019 के चुनावों में बढ़कर करीब 72 रुपए हो गया। यह तो सबको पता है कि भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली और 26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना। लेकिन, यह कम ही लोगों को पता होगा कि पहले आम चुनाव 1951-52 में कैसे हुए थे और किस तरह वोटिंग हुई थी। पहले चुनावों में लोकसभा की 497 तथा राज्य विधानसभाओं की 3,283 सीटों के लिए भारत के 17 करोड़ 32 लाख 12 हजार 343 रजिस्टर्ड वोटर थे। कुल 68 फेज में वोटिंग हुई थी। आजादी के संघर्ष के कारण आम जनता में तो कांग्रेस का ही नाम बैठा था। इस वजह से कांग्रेस ने 364 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। उस वक्त एक निर्वा...

यहां के दशहरे का राम-रावण से कोई लेना देना नहीं, 75 दिन चलती हैं रस्में, इस बार भी सब पूरी होंगी

Image
बस्तर का दशहरा सबसे खास और सबसे अलग होता है। इसका राम और रावण से कोई सरोकार नहीं है। यहां न तो रावण का पुतला जलाया जाता है और न ही रामलीला होती है। यहां दशहरा पूरे 75 दिनों तक चलता है। इन 75 दिनों में कई रस्में होती हैं, जिनमें एक प्रमुख रस्म रथ परिचालन की भी है। यह रस्म पिछले 610 सालों से चली आ रही है। कोरोनाकाल में कुछ समय पहले जब पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ब्रेक लगा था, तब लोगों ने सोचा था कि बस्तर दशहरा भी फीका रहेगा। लेकिन, यहां प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति ने बीच का रास्ता निकाला और 610 सालों से चली आ रही परंपरा को जारी रखा। इस परंपरा से आम लोगों को दूर किया गया और लोगों के दर्शन के लिए टेक्नाेलॉजी का सहारा लिया गया। यूट्यूब चैनल, टीवी के माध्यम से लोगों को पूरी प्रक्रिया के लाइव दर्शन करवाए जा रहे हैं और परंपराओं और रस्मों में सिर्फ जरूरी लोगों को हिस्सा लेने दिया जा रहा है। यहां दशहरा पूरे 75 दिनों तक चलता हैं। इन 75 दिनों में कई रस्में होती हैं, जिनमें एक प्रमुख रस्म रथ परिचालन की भी है। यह रस्म पिछले 610 सालों से चली आ रही है। कोरोना से ब...

बीकानेर में रावण नहीं जलेगा, दशहरा कमेटी रावण दहन के लिए जमा पैसों से बनाएगी क्वारैंटाइन सेंटर

Image
राजस्थान के बीकानेर के जिस मैदान पर शहर का सबसे बड़ा रावण का पुतला जलता था, वहां इस बार रावण तो नहीं जलेगा, लेकिन 'रावण' की तरह फैल रहे कोरोना को हराने की कोशिश जरूर होगी। बीकानेर के धरणीधर ट्रस्ट की दशहरा कमेटी ने तय किया है कि रावण दहन का कार्यक्रम नहीं होने से बचने वाली रकम से दशहरा मैदान में एक क्वारैंटाइन सेंटर खोला जाएगा। आयोजकों ने कहा- कोरोनावायरस भी रावण की तरह खतरनाक है और इसका खात्मा करना वर्तमान समय की जरूरत है। आयोजक रामकिशन आचार्य ने बताया कि बीकानेर में कोरोना संक्रमण चरम पर है। ऐसे में रावण दहन के बजाय लोगों को सुरक्षा की जरूरत है। हम रावण दहन करने के बजाय बीमार लोगों के लिए क्वारैंटाइन सेंटर स्थापित कर रहे हैं। जो लोग कोरोना संक्रमित हैं, घर छोटे हैं, वे यहां आकर क्वारैंटाइन हो सकते हैं। यह सेंटर दशहरा मैदान में ही बनाया जाएगा। इसके लिए 30 बेड का भी इंतजाम कर लिया गया है। धरणीधर मैदान पर होने वाले दशहरा समारोह में 25 से 30 हजार लोग आते थे, जो महामारी के दौरान खतरनाक होता। इस बार सरकार ने ऐसे आयोजनों पर रोक लगा दी है। इसलिए कमेटी ने सोचा कि मेले के लिए मिले चं...

अगर आप स्टूडेंट हैं तो यह आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है; पढ़ें बीते हफ्ते की खबरों से जुड़ा GK

Image
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें General Knowledge For School Students Weekly Roundup | Top GK Questions for KIDS, Clear All Your Doubts Now from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31FfWOM via IFTTT

इंजीनियरिंग करके फिल्मों में गए और कंगना के हीरो बने; फिर राजनीति में आए और मोदी के हनुमान बने

Image
बात 2015 के विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले की है। पटना में अपने घर श्रीकृष्ण पुरी में बैठे रामविलास पासवान लोगों से मिल रहे थे। उसी घर के दूसरे कमरे में बेटे चिराग लोजपा के कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग कर रहे थे। तब वहां मौजूद लोगों से रामविलास ने बड़े गर्व से कहा- ‘चिराग ने सब संभाल लिया है।’ जब लोगों ने रामविलास से कहा कि आपका बेटा बहुत ज्यादा शहरी दिखता है, जबकि आप जमीनी नेता दिखते हैं। तब मुस्कुराते हुए रामविलास ने कहा- ‘वो दिल्ली में पढ़ा है न।’ खून में राजनीति, सपनों में बॉलीवुड 31 अक्टूबर 1982 को जब चिराग का जन्म हुआ, तब पिता रामविलास लोकसभा के सदस्य थे। बचपन से ही घर पर राजनीतिक माहौल था। उनकी स्कूली पढ़ाई दिल्ली में हुई और झांसी की बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से कम्प्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक किया। पढ़ाई के बाद न तो राजनीति में आए और न ही किसी टेक कंपनी में नौकरी करने गए। उन्होंने बॉलीवुड का रुख किया। साल 2011 में कंगना रनोट के साथ उनकी फिल्म आई थी, ‘मिले न मिले हम’। 13 करोड़ में बनी ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई थी। इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सिर्फ 97 लाख रुपए था। फिल्म के प्रमोशन ...

उत्तराखंड की दो समधन ने 3 साल पहले शुरू किया ऑनलाइन गिफ्ट स्टोर, अब सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रु.

Image
निशा ग्रेजुएट हैं और गुड्डी पांचवीं पास, लेकिन ये दोनों ऑनलाइन गिफ्टिंग प्लेटफाॅर्म ‘गीक मंकी’ की डायरेक्टर हैं। दोनों की उम्र भले ही 50 प्लस है, लेकिन इनका जज्बा किसी यंग एंटरप्रेन्योर से कम नहीं है। साल 2017 में इन्होंने अपने घर से गिफ्ट आइटम का बिजनेस शुरू किया था। उसी बिजनेस को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने से कंपनी का सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए का हो चुका है। निशा गुप्ता एक बिजनेसमैन फैमिली से ताल्लुक जरूर रखती हैं, लेकिन 2017 से पहले वो बिजनेस के बारे में कुछ नहीं जानती थीं। उन्होंने घर पर ही एक छोटी सी दुकान खोली। यहां घरेलू सामान और गिफ्ट आइटम बेचने शुरू किए। वहीं, गुड्डी पहाड़ों के गांव में रहा करती थीं। निशा ऑनलाइन गिफ्टिंग प्लेटफॉर्म ‘गीक मंकी’ की डायरेक्टर हैं। साल 2017 में इन्होंने अपने घर से गिफ्ट आइटम का बिजनेस शुरू किया था। इन दोनों महिलाओं के साथ आने और बिजनेस करने की कहानी थोड़ी फिल्मी है। गुड्डी थपलियाल का बेटा अनिल और निशा गुप्ता की बेटी वैशाली एक-दूसरे से प्यार करते थे। दोनों ने एक साथ रोहतक के एक कॉलेज से एमसीए किया और फिर गुड़गांव में जॉब भी करने लगे। 2017 में ...