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Showing posts from December 20, 2020

किसान बोले- बात करेंगे, पर शर्तें नहीं छोड़ेंगे; NDA को 3 महीने में दूसरा झटका और केरल में कोरोना के नए स्ट्रेन का खतरा

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नमस्कार! मध्यप्रदेश सरकार ने लव जिहाद बिल को मंजूरी दी। बॉक्सिंग-डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले ही दिन ऑलआउट हो गई। अरुणाचल में चीन से मुकाबले के लिए बर्फ में डटे हैं ITBP के जवान। बहरहाल, शुरू करते हैं न्यूज ब्रीफ। आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल में आखिरी बार मन की बात करेंगे। उन्होंने लोगों से अगले साल की योजनाओं के बारे में पूछा है। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने रविवार को मन की बात के दौरान लोगों से ताली-थाली बजाने की अपील की है। गुजरात के साबरमती से केवड़िया के बीच बंद पड़ी सी प्लेन सर्विस आज से फिर शुरू होगी। प्लेन के मेंटेनेंस के चलते यह सर्विस बंद थी। देश-विदेश किसान बात करेंगे, शर्तें नहीं छोड़ेंगे सरकार की तरफ से बातचीत के न्योते पर किसानों ने शनिवार को फैसला ले लिया। उन्होंने बातचीत के लिए सरकार को 29 दिसंबर की तारीख दी है। लेकिन, किसानों ने साफ कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संभावनाएं और मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) की कानूनी गारंटी बातचीत के एजेंडे में होनी चाहिए। किसान नेता राकेश टिकैत ने यह जानकारी दी। ...

कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, हमें काम के महत्व को समझना चाहिए

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कहानी- महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे थे। उस समय उन्हें मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से ही जाना जाता था। जब वे कोलकाता में कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, तो वहां उनकी मुलाकात घोषाल जी से हुई। घोषाल जी ही कांग्रेस कार्यालय का कामकाज देख रहे थे। गांधीजी ने उनसे कहा, 'मैं यहां काम करने आया हूं। कोई काम हो तो बताएं।' घोषाल जी ने गांधी को देखा तो उन्हें लगा कि ये क्या काम करेगा? कुछ सोचकर वे बोले, 'मेरे पास कोई बहुत बड़ा काम नहीं है। यहां बहुत से पत्र आए हुए हैं। इनमें से जो उपयुक्त हैं, उन्हें अलग निकालना है और उनके उत्तर देना है। क्या तुम ये काम कर सकते हो?' गांधीजी इस काम के लिए तैयार हो गए और उन्होंने पत्रों के जवाब भी दे दिए। घोषाल जी को ये देखकर आश्चर्य हुआ कि एक-एक पत्र को गंभीरता से पढ़ा गया और उनके सही उत्तर भी गांधीजी द्वारा दिए गए। घोषाल जी कार्यालय से निकलने लगे तो उनकी शर्ट के बटन गांधीजी ने लगा दिए। आमतौर ये काम घोषाल जी का सेवक ही करता था। जब गांधीजी ने बटन लगाए तो घोषाल जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने गा...

खेती में फायदा नहीं हुआ तो नई तकनीक से अमरूद उगाना शुरू किया, अब हर साल 10 लाख की कमाई

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क्या आपने कभी डेढ़ से दो किलो का अमरूद देखा है ? आज हम आपको एक ऐसे ही किसान से मिलवाने जा रहे हैं, जो अपने खेत में इतने बड़े अमरूद उगाते हैं। गुजरात के टंकारा तहसील के रहने वाले मगन कामरिया नई तकनीक से अमरूद की खेती करते हैं। जिससे बड़े आकार और 2 किलो तक वजन का अमरूद पैदा होता है। अब वे 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अमरूद की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें हर साल 10 लाख रुपए की कमाई हो रही है। मगन कहते हैं कि पहले वे कपास, मूंगफली और जीरा उगाते थे। लेकिन, उसमें लागत के हिसाब से कमाई नहीं हो रही थी। पांच साल पहले उन्हें इजरायली तकनीक से उगाए जाने वाले अमरूद के बारे में पता चला। उन्होंने तय किया कि वे भी अमरूद की खेती करेंगे। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर से थाईलैंड में उगाए जाने वाले अमरूद के 5 हजार पौधे मंगाए। इजराइली तकनीक से अमरूद उगाते हैं मगन कहते हैं कि मैंने सबसे पहले इजरायली टेक्नोलॉजी से अमरूद उगाना सीखा। इसमें टपक विधि से सिंचाई करते हैं। पौधों पर बूंद-बूंद पानी टपकाया जाता है। इससे फसल अच्छी होती है और पानी की खपत भी कम होती है। इतना ही नहीं, रोज-रोज की सिंचाई से छुटकारा...

कहानी उस मशहूर शायर की जो अपने शौक के चलते कर्जदार हो गया, जुए की लत के चलते 3 महीने जेल में कटे

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'होगा कोई ऐसा जो 'गालिब' को न जाने, शायर तो अच्छा है पर बदनाम बहुत है..' ये शेर है मिर्जा असदुल्लाह बेग खान का, जिन्हें लोग मिर्जा गालिब के नाम से जानते हैं। गालिब उनका तखल्लुस (पेन नेम) था। इसी नाम से वो शेरो-शायरी करते थे। उनके दादा उज्बेकिस्तान से भारत आए थे। मिर्जा गालिब का जन्म आज ही के दिन 1797 में आगरा के एक दौलतमंद खानदान में हुआ था। उनकी शादी भी दिल्ली के एक रईस खानदान की लड़की से हुई थी। मगर उनकी जिंदगी मुश्किलों में ही गुजरी। गालिब के सात बच्चे हुए और कोई भी दो साल से ज्यादा नहीं जी पाया। शराब पीने के बड़े शौकीन, वो भी महंगी और अंग्रेजी वाली इस्लाम में शराब को हराम माना जाता है, लेकिन गालिब को शराब पीने का बहुत शौक था। वो भी महंगी और अंग्रेजी। भले ही पैसों की कितनी ही किल्लत हो। चाहे सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर शराब लानी पड़े, लेकिन लाते थे और पीते थे। एक शाम मिर्जा को शराब न मिली, तो वो नमाज पढ़ने चले गए। इतने में उनका एक शागिर्द आया और उसने गालिब को शराब की बोतल दिखाई। बोतल देखते ही गालिब मस्जिद से निकलने लगे, तो किसी ने कहा- 'ये क्या कि बगैर नमाज पढ...

संडे स्पेशल मखाना चॉप की रेसिपी, स्वाद और सेहत से भरपूर ये डिश बच्चों को खूब पसंद आएगी

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कोरोना से भी जानलेवा है वायु प्रदूषण; जिनके घर सड़क के पास, उन्हें बीमारियों का ज्यादा खतरा

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वायु प्रदूषण कोरोनावायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। इसका सबूत हाल में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक रिपोर्ट में मिला है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में वायु प्रदूषण की वजह से भारत में 16.7 लाख लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2020 में देश में कोरोना महामारी से हुई कुल मौतों से करीब 12 गुना ज्यादा है। देश में कोरोना से अब तक 1.47 लाख लोगों की जान गई है। यही नहीं, वायु प्रदूषण के कारण देश को 2.60 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल देश में करीब 14 करोड़ लोग खराब हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 13 भारत में ही हैं। ऐसे में खराब हवा स्वस्थ लोगों को भी बीमार बना रही है और पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा बन रही है। वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां कौन सी हैं? एम्स (AIIMS) दिल्ली में रुमेटोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉक्टर उमा कुमार कहती हैं। वायु प्रदूषण से सभी तरह की नॉन कम्युनिकेबल डिजीज का खतरा होता है। हार्ट, कार्डियो वैस्कुलर, ऑटो इम्युन डिजीज का भी सबसे ज्यादा खतरा होता है। हाल ही में ब्रिटेन में हुई एक स्टडी के मुताबिक एयर प...

तेजी से बढ़ रहा है बुजुर्ग मां-बाप की देखरेख का खर्च, आसान नहीं है इसकी तैयारी

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कुछ दशक पहले ज्यादातर लोग संयुक्त परिवारों में रहते थे। बड़े सदस्य बच्चों की और बच्चे बड़े सदस्यों की आसानी से देखभाल कर पाते थे। लेकिन, बढ़ते शहरीकरण और एकल परिवारों ने कई बदलाव किए हैं। अब बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि काफी खर्चीली भी हो गई है। खासकर जब बात बुजुर्गों की देखभाल की हो, तो मामला और पेचीदा हो जाता है। क्योंकि, बुजुर्गों की प्रतिरक्षा शक्ति और घाव भरने की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ काफी कम हो जाती है। पहले जब लोगों के कई बच्चे होते थे, तब बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का काम अपेक्षाकृत आसान होता था, लेकिन अब सिर्फ एक या दो बच्चों पर ही मां-बाप की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी होती है। भारत में तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की आबादी नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2003 तक भारत में हर महिला के औसतन 3 बच्चे होते थे। लेकिन, 2017 में लैंसेट में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा प्रति महिला करीब 2.2 तक पहुंच गया है। यानी जनसंख्या वृद्धि दर मंद पड़ चुकी है। अगर यह दर 2.1 हो गई तो यह रिप्लेसमेंट रेट पर पहुंच जाएगी। यान...

सच यही है कि देवी की तरह पूजी जाती लड़कियां मर्दाना धरती पर उनकी मामूली नुमाइंदा तक नहीं बन पाई हैं

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हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार ने तमाम सरकारी कामों की शुरुआत बेटियों की पूजा से करने को कहा है। यानी आने वाले दिनों में सरकारी महकमे बेटियों के पांव धोते और उन्हें तिलक लगाते दिख जाएंगे। यह एक तरह का सरकारिया एलान है कि भई हमने तो स्त्री को शक्ति मान लिया। देखो, उसकी पूजा भी कर दी। अब तो खुश! लेकिन क्या इससे कुछ भी बदलने वाला है? क्या पूजा होते ही लड़कियों के आसपास एक सुनहरा घेरा बन जाएगा, जो सड़क से लेकर दफ्तर तक ताक में बैठे मर्दों को रोकेगा! घूरो मत, छेड़ो मत, हाथ न लगाओ, फलां लड़की कल-परसों या बीते साल पूजी गई थी। न! ये सब कुछ नहीं होगा, बल्कि होगा ये कि माथे पर तिलक की जगह जख्म ले लेगा,आंखों में चमक की जगह आंसू होंगे और जिन हाथों ने पांव धोए थे, उनमें से ही कोई हाथ उसके वजूद को रौंद रहा होगा। कुल मिलाकर सच यही है कि देवी की तरह पूजी जाती लड़कियां मर्दाना धरती पर उनकी मामूली नुमाइंदा तक नहीं बन पाई हैं। उन्हें देवी, माता, रूहानी ताकत से भरपूर मानने वाला देश उन पर ही हिंसा के नए कीर्तिमान बना रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) का 2019 का डेटा बताता है कि 4 लाख से ज्यादा औ...

प्रदर्शन में शामिल युवा बोले- हम किसानों के लिए लड़ रहे हैं, जान भी चली जाए तो परवाह नहीं

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दिल्ली की सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को एक महीना हो चुका है। यहां अब बुजुर्गों की तुलना में युवा प्रदर्शनकारी अधिक हैं। टीकरी बॉर्डर और सिंघू बॉर्डर पर मीलों तक फैले ट्रालियों के काफिले के दोनों तरफ अब ट्रैफिक चलने लगा है। ट्रेक्टरों पर बैठे युवा तेज आवाज में संगीत बजाते हुए और नारेबाजी करते हुए गुजरते रहते हैं। कई बार उनके हाथों में लाठियां भी होती हैं। उनके नारे उग्र हो जाते हैं। ऐसे ही एक ट्रेक्टर को रोकते हुए एक बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम यहां आंदोलन में मारे गए किसानों की मौत का गम मना रहे हैं, कोई जश्न नहीं।' ये सुनकर युवाओं ने लाउडस्पीकर पर बज रहा संगीत बंद कर दिया और ट्रैक्टर को पीछे घुमा लिया। अगले दिन एक बुजुर्ग किसान नेता मंच से ऐलान कर रहे थे, 'ट्रैक्टर पर स्पीकर बांध कर हुल्लड़बाजी ना करें। हमें गांधी और भगत सिंह के रास्ते पर चलना है। सब्र और त्याग हमारा रास्ता है। हमारे किसान मारे जा रहे हैं। ये आंदोलन है कोई जश्न नहीं।' गुरविंदर सिंह चार युवाओं के साथ इनोवा कार से आए हैं। वो कहते हैं, 'मेरा पूरा गांव, खानदान यहीं है...

पढ़िए, लाइफ एंड मैनेजमेंट की इस हफ्ते की सारी स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

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1. हाल ही में जब एफसी बार्सिलोना के लिए लियोनेल मेसी ने 644 वां गोल किया तो उन्होंने मशहूर खिलाड़ी पेले के एक क्लब के लिए सबसे ज्यादा गोल करने के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। ऐसे कई रिकॉर्ड वे तोड़ चुके हैं। पढ़िए उनकी सक्सेस स्टोरी... इंस्पायरिंग : छोटा कद लिए बड़े सपने के पीछे दौड़ते रहे, दिन में प्रैक्टिस और रात में इंजेक्शन लगवाते थे लियोनेल मेसी 2. थ्यूसिडिडीज़ बेहद अमीर परिवार से थे। एथेनियन इतिहासकार और जनरल भी थे। इतिहास में इन्होंने जो बदलाव किए थे, उनकी वजह से ही इनका काम मशहूर हुआ था। पढ़िए उनके कुछ विचार... प्रेरणादायक : इतिहासकार थ्यूसिडिडीज़ के विचार जो आपमें भी उत्साह भर देंगे 3. संस्थान के माहौल को न समझ पाने और लगातार नकारात्मकता झेलने के बावजूद ज्यादातर लोग अपनी पुरानी नौकरी को छोड़ने में झिझकते हैं। ऐसा इसलिए कि वे बदलाव से डरते हैं, या करियर स्विच से होने वाले फायदों के बारे में सोच ही नहीं पाते हैं। ये संकेत आपको बताएंगे कि अब समय है बदलाव का ... टिप्स : ये संकेत बताएंगे कि अब पुरानी नौकरी छोड़ नया काम शुरू करना चाहिए 4. आम धारणा है कि इंट्रोवर्ट्स में आत्मविश्वा...

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1. यदि जीडीपी को विकास का पैमाना माना जाए तो पिछले बीस वर्षों में भारत ने अपनी विकास दर को बनाए रखा है। लेकिन, यह विकास जीवन स्तर की बेहतरी में नज़र क्यों नहीं आता? क्या जनता के स्वास्थ्य और खुशहाली के बिना विकास को पूर्ण माना जा सकता है? इसी सवाल की पड़ताल करती है यह स्टोरी क्या सचमुच में इसे ही विकास कहेंगे? 2. चक्र की मदद से कृष्ण शिशुपाल का शिरश्छेदन करते हैं जो उनका लगातार अपमान कर रहा था। वे चक्र से दुर्वासा ऋषि को विनम्रता भी सिखाते हैं। चक्र का केंद्र स्थिरता का प्रतीक है तो उसकी परिधि चेतना और तीलियां बौद्ध धर्म के विभिन्न सिद्धांतों का प्रतीक। चक्र एक है और उसका महत्व अनंत है। इसकी इसी अहमियत के बारे में बता रहे हैं प्राचीन भारतीय धर्मशास्त्रों के जाने-माने आख्यानकर्ता देवदत्त पटनायक... चक्र अस्त्र की तरह नाश करता है तो विनम्रता भी सिखाता है, आखिर क्या है इसकी अहमियत? 3. सलमान की शख्सियत इतनी अलहदा है कि जो भी इनसे जुड़ता है, उसकी कई खास यादगारें बन जाती हैं। सलमान खान के जन्मदिवस के मौके पर उनसे जुड़ी यादें भास्कर को साझा कर रही हैं जानी-मानी फिल्म लेखिका, समीक्षक और इतिहासक...

मोदी ने कश्मीर में भी शुरू की आयुष्मान भारत योजना; क्या है ये स्कीम? इन 4 राज्यों से हैं, तो नहीं मिलेगा फायदा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को वर्चुअली लॉन्च किया। इस योजना में जम्मू-कश्मीर के हर परिवार को पांच लाख का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। ये योजना कई राज्यों में पहले से ही चल रही है। जम्मू-कश्मीर ऐसा पहला राज्य है जहां के हर परिवार को इस स्कीम का लाभ मिलेगा। AB-PMJAY सेहत योजना क्या है? अब तक कितने लोग इस योजना का लाभ ले चुके हैं? जम्मू कश्मीर में योजना बाकी राज्यों से कितनी अलग है? स्कीम का लाभ लेने के लिए किन कागजात की जरूरत होगी? किस आधार पर मिलेगा कवर? जहां सिर्फ गरीबों के लिए ये योजना है, वहां किन लोगों के नाम दर्ज होंगे? आइए जानते हैं… AB-PMJAY सेहत योजना क्या है? 23 सिंतबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रांची से AB-PMJAY सेहत योजना को लॉन्च किया था। योजना के तहत आने वाले परिवारों को हर साल 5 लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलता है। अब तक इस योजना के दायरे में जो राज्य थे वहां के 22 करोड़ 66 लाख से ज्यादा परिवारों में से 13 करोड़ 4 लाख से ज्यादा परिवार योजना के लिए एलिजिबल थे। जम्मू ...

राम मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाया, किसानों के लिए 3 विवादित कानून बनाए; सांसदों-मंत्रियों की सैलरी काटी

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मोदी सरकार का पूरा साल कोरोना से निपटने के लिए गाइडलाइन बनाने और देश को लॉक-अनलॉक करने में गुजर गया। इन सबके बीच सरकार ने कुछ बड़े फैसले लिए और कुछ नए कानून भी बनाए। दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक तीन दिन पहले प्रधानमंत्री ने श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट बनाने का ऐलान किया। कोरोना के बीच संसद खुली और सरकार ने किसानों से जुड़े ताबड़तोड़ तीन कृषि बिल संसद में पास करवा लिए। अब इन्हीं बिलों के खिलाफ किसान सड़कों पर हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी सरकार ने शुरू किया। चलिए देखते हैं इस साल के सरकार के 12 सबसे बड़े फैसले, नीति और कानून कौन से रहे... आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें Narendra Modi Government Top 10 Decisions Of 2020; Farm Bill | National Education Policy To Jammu Kashmir Hindi Official Language National Education Policy from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2KOeeVQ via IFTTT