हर 48 मिनट में एक बच्ची होती है यौन शोषण का शिकार, लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को मिटाने और उन्हें उनका हक दिलाने के लिए मनाया जाता है ये दिन
लड़कियों के साथ पैदा होने से लेकर जीवित रहने तक हर स्तर पर भेदभाव किया जाता है। वे घर में रहते हुए अपने ही भाईयों के साथ बराबरी का हक पाने के लिए भी कई बार लड़ती हुई नजर आती हैं। वहीं स्कूल, कॉलेज या ऑफिस में भी उन्हें अपने छवि बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करने की जरूरत पड़ती है। समाज में लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को मिटाने और उन्हें उनका हक दिलाने के लिए हर साल 11 अक्टूबर को इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाया जाता है। इसे पहली बार 2012 में मनाया गया था। लड़कियों के लिए बने इस विशेष दिन के माध्यम से उनके अधिकारों का संरक्षण करना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों व मुश्किलों की पहचान करना है। ऐसे हुई इस खास दिन को मनाने की शुरुआत इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाने की पहल एक गैर-सरकारी संगठन 'प्लान इंटरनेशनल' प्रोजेक्ट के रूप में की गई। इस संगठन ने "क्योंकि मैं एक लड़की हूं" नाम से एक अभियान भी शुरू किया जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए कनाडा सरकार से संपर्क किया। फिर कनाडा सरकार ने 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा और संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर, 2011 ...